| | Vogel erspäht - ein Glucksen -
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| 1 | | Vogel erspäht - ein Glucksen - |
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sie schleicht sich flach heran, |
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sie rennt, man sieht die Beine nicht, |
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das Aug weit aufgetan, |
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ihr Kiefer zuckt, mahlt hungrig, |
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kaum halten Zähne stand, |
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sie springt, doch Kehlchen sprang zuerst - |
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Pech, Kätzchen, - aus dem Sand. |
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Voll Saft reifte dein Hoffen, |
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die Zunge schwamm dir schon, |
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doch ließ das Glück auf hundert Zeh’n |
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den Vogel schwirr’n davon. |
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© Bertram Kottmann, |
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aus dem Amerikanischen: |
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She sights a Bird—she chuckles— |
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She flattens—then she crawls— |
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She runs without the look of feet— |
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Her eyes increase to Balls— |
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Her Jaws stir—twitching—hungry— |
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Her Teeth can hardly stand— |
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She leaps, but Robin leaped the first— |
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Ah, Pussy, of the Sand, |
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The Hopes so juicy ripening— |
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You almost bathed your Tongue— |
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When Bliss disclosed a hundred Toes— |
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And fled with every one— |
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| | | Emily Elizabeth Dickinson, 1862 |
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| | | Die Deutsche Gedichtbibliothek |
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